बिहार में बिजली कनेक्शन चाहे घरेलू, दुकान (कमर्शियल), कृषि, आटा चक्की मिल, या LTIS/HTIS किसी भी श्रेणी का हो—अगर उसमें बिजली चोरी पकड़ी जाती है तो उपभोक्ता पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है। कई लोग सही जानकारी न होने के कारण बड़ी गलती कर बैठते हैं और बाद में भारी जुर्माना, FIR और कंपाउंडिंग राशि चुकानी पड़ती है।
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compounding राशी कितनी जमा करनी पड़ती है जान ले
इस लेख में हम बिजली चोरी से जुड़े सभी नियम, FIR किन कारणों से होती है, कंपाउंडिंग राशि क्या होती है, कैटेगरी के अनुसार कितना जुर्माना लगता है, और कनेक्शन दोबारा कैसे बहाल होता है—सब कुछ आसान, साफ और मानव-लिखित हिंदी में समझाएंगे।
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| Post Type | Bijali Bill |
| Scheme Name | compounding राशी कितनी जमा करनी पड़ती है जान ले |
| Check Mode | Online |
| Department | Bihar Electricity Department |
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| बिजली चोरी की fir किन किन कारणों से की जाती है | इस लेख में हम बिजली चोरी से जुड़े सभी नियम, FIR किन कारणों से होती है, कंपाउंडिंग राशि क्या होती है, कैटेगरी के अनुसार कितना जुर्माना लगता है, और कनेक्शन दोबारा कैसे बहाल होता है—सब कुछ आसान, साफ और मानव-लिखित हिंदी में समझाएंगे। |
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बिजली चोरी क्या मानी जाती है?
बिजली अधिनियम के अनुसार, निम्न स्थितियों में बिजली चोरी मानी जाती है:
1) बिना कनेक्शन के बिजली उपयोग
अगर किसी स्थान पर बिजली कनेक्शन ही नहीं है और फिर भी तार जोड़कर बिजली का उपयोग किया जा रहा है, तो यह सीधी चोरी है।
2) मीटर बायपास करके बिजली लेना
यदि कनेक्शन मौजूद है लेकिन:
- मीटर को बायपास किया गया है,
- मीटर से पहले सीधे तार जोड़कर बिजली ली जा रही है,
- मीटर से छेड़छाड़ (टेम्परिंग) की गई है,
तो इसे भी बिजली चोरी माना जाता है।
3) बकाया बिल के बाद कटे कनेक्शन से बिजली लेना
अगर उपभोक्ता का बिजली बिल बकाया है, नोटिस मिलने के बाद कनेक्शन डिस्कनेक्ट कर दिया गया है, और फिर भी बिना भुगतान के बिजली उपयोग किया जा रहा है—तो यह भी चोरी की श्रेणी में आता है।
इन तीन मुख्य कारणों से बिजली विभाग FIR दर्ज करता है।
बिजली चोरी पकड़े जाने पर क्या होता है?
जब बिजली चोरी पकड़ी जाती है, तो आमतौर पर यह प्रक्रिया होती है:
- बिजली विभाग की टीम मौके पर जांच करती है
- मीटर उखाड़ लिया जाता है और लाइन डिस्कनेक्ट कर दी जाती है
- उपभोक्ता के खिलाफ FIR दर्ज की जाती है
- मीटर को विभागीय कार्यालय ले जाया जाता है
- उपभोक्ता को फाइन (जुर्माना) और कंपाउंडिंग राशि की जानकारी दी जाती है
इसके बाद उपभोक्ता को कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
FIR होने के बाद उपभोक्ता क्या करें?
अगर आपके खिलाफ FIR दर्ज हो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं—लेकिन सही स्टेप्स फॉलो करना बेहद जरूरी है:
- नजदीकी पुलिस थाना जाकर FIR की कॉपी प्राप्त करें
- FIR में दी गई सभी जानकारियां जांचें:
- उपभोक्ता का नाम
- पिता का नाम
- पता
- कंज्यूमर नंबर
- मीटर नंबर
- चोरी का कारण
- कुल जुर्माना राशि
- FIR में बताई गई फाइन राशि को बिजली विभाग के डिवीजन ऑफिस में जमा करें
कंपाउंडिंग राशि क्या होती है?
कंपाउंडिंग राशि एक अतिरिक्त राशि होती है, जो कानूनी कार्रवाई को निपटाने के लिए ली जाती है। यह राशि कनेक्शन की श्रेणी और लोड (वॉट/किलोवॉट/HP) के अनुसार अलग-अलग होती है।
नीचे श्रेणीवार कंपाउंडिंग राशि दी गई है (उदाहरण के तौर पर):
घरेलू (Domestic) कनेक्शन – कंपाउंडिंग राशि
- 1 से 999 वॉट तक: ₹4,000
- 1000 से 1999 वॉट (लगभग 2 किलोवॉट): ₹8,000
यानी जैसे-जैसे लोड बढ़ता है, कंपाउंडिंग राशि भी दोगुनी हो जाती है।
कमर्शियल (दुकान/व्यापार) कनेक्शन – कंपाउंडिंग राशि
- 1 से 999 वॉट तक: ₹10,000
- 1000 से 1999 वॉट: ₹20,000
कमर्शियल कनेक्शन में कंपाउंडिंग राशि घरेलू की तुलना में काफी ज्यादा होती है।
आटा चक्की / LTIS कनेक्शन – कंपाउंडिंग राशि
LTIS (Low Tension Industrial Supply) में कंपाउंडिंग राशि HP (हॉर्स पावर) के आधार पर लगती है।
- प्रति HP लगभग ₹20,000
उदाहरण:
अगर किसी आटा चक्की का कनेक्शन 5 HP का है:
- 5 × ₹20,000 = ₹1,00,000 (कंपाउंडिंग राशि)
इसके अलावा FIR में जुर्माना अलग से लगाया जाता है।
LTIS / HTIS में चोरी क्यों सबसे खतरनाक है?
अगर LTIS या बड़े इंडस्ट्रियल कनेक्शन में चोरी पकड़ी जाती है, तो:
- FIR जुर्माना ₹2,50,000 से शुरू हो सकता है
- कई मामलों में यह ₹3,00,000 से ₹4,00,000 तक जाता है
- ऊपर से कंपाउंडिंग राशि अलग
कुल मिलाकर मामला ₹4–5 लाख तक पहुंच सकता है।
👉 इसलिए LTIS/HTIS उपभोक्ताओं को कभी भी बिजली चोरी नहीं करनी चाहिए।
भुगतान के बाद कनेक्शन कैसे बहाल होता है?
जब आप:
- FIR जुर्माना जमा कर देते हैं
- कंपाउंडिंग राशि का फॉर्म भरते हैं
- कंपाउंडिंग राशि का भुगतान करते हैं
तो इसके बाद:
- डिवीजन ऑफिस से भुगतान रसीद प्राप्त करें
- रसीद की कॉपी थाना और बिजली कार्यालय में जमा करें
- सेक्शन ऑफिस में आवेदन दें
इसके बाद नया मीटर लगाकर आपका बिजली कनेक्शन दोबारा चालू किया जाता है।
पूरी प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतें
- बार-बार ऑफिस के चक्कर
- बिल और रसीद लेने में देरी
- अलग-अलग शहरों में कार्यालय (जैसे साउथ बिहार में गया)
- समय और पैसे दोनों की बर्बादी
इसीलिए सबसे समझदारी भरा कदम है—बिजली चोरी से पूरी तरह बचना।
बिजली चोरी छोटी गलती नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी अपराध है। कुछ यूनिट बिजली के लालच में:
- FIR
- भारी जुर्माना
- कंपाउंडिंग राशि
- मानसिक तनाव
- समय और पैसा—सब गंवाना पड़ सकता है।
पुरानी कहावत आज भी सही है—ईमानदारी सबसे सस्ती पड़ती है।
अगर आपको इस विषय से जुड़ा कोई सवाल या संदेह हो, तो कमेंट में जरूर पूछें। ऐसे ही जानकारीपूर्ण लेखों के लिए जुड़े रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. क्या बिजली चोरी में जेल भी हो सकती है?
हाँ, गंभीर मामलों में जेल का प्रावधान भी है, खासकर बार-बार चोरी करने पर।
Q2. क्या कंपाउंडिंग राशि भरने से केस खत्म हो जाता है?
कई मामलों में कंपाउंडिंग के बाद कानूनी प्रक्रिया सरल हो जाती है, लेकिन यह विभाग और केस पर निर्भर करता है।
Q3. क्या मीटर खराब होने को चोरी माना जाता है?
नहीं, अगर मीटर खराब है और छेड़छाड़ नहीं है, तो यह चोरी नहीं मानी जाती।
Q4. क्या ऑनलाइन कंप्लेंट से FIR रुक सकती है?
नहीं, चोरी पकड़े जाने के बाद FIR प्रक्रिया अलग होती है।
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